श्याम मूर्ति भारती
आधुनिक भारत में सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन ने भारतीय समाज को आधुनिकता, समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में मार्गदर्शन दिया। 19वीं और 20वीं शताब्दी में सामाजिक और धार्मिक सुधारकों ने परंपरागत रीति-रिवाजों, अंधविश्वासों और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया। इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना, महिला शिक्षा और अधिकारों को बढ़ावा देना, तथा धर्म के नाम पर होने वाले अंधविश्वास और उत्पीड़न को कम करना था। ब्रह्म समाज, आर्य समाज, प्रार्थना समाज और सत्यशोधक समाज जैसे आंदोलन सामाजिक जागरूकता और नैतिक सुधार के प्रमुख उदाहरण हैं। इस शोध पत्र में इन आंदोलनों की उत्पत्ति, उद्देश्य, कार्यप्रणाली और उनकी आधुनिक भारतीय समाज पर दीर्घकालिक प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।
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